Monday, May 4, 2020

सृजति शंखनादं किल कविता

सृजति शंखनादं किल कविता
कवि-विन्ध्येश्वरी प्रसाद मिश्र विनय
प्रकाशक-राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली
अंकित मूल्य-270
पृष्ठ संख्या-302
प्रथम संस्करण-2015


विन्ध्येश्वरी प्रसाद मिश्र विनय आधुनिक संस्कृत साहित्य के महत्त्वपूर्ण कवि हैं आपने लगभग 15 कृतियों की रचना की है प्रस्तूत काव्य कुछ समय से चर्चा में है क्योंकि यह साहित्य अकादेमी के मुख्य पुरस्कार की अंतिम चयन सूची तक पहुंच चुका है इस काव्य ग्रन्थ में 4 भाग हैं जिनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है
1 पद्यप्रस्तार:-इस भाग में पारंपरिक छंदों में निबद्ध कविताएं संकलित हैं ये कवितायेँ 38 शीर्षकों में हैं यथा  श्रीकाशीविश्वनाथस्तुतिः,  अन्योक्तयः,  सूक्तिमंजरी,  बालभावः इत्यादि इसमें जाह्नवीदण्डकम् शीर्षक से एक दण्डक भी निबद्ध है तो दण्डक के भेदों को आधार बनाकर कुछ मुक्तककाव्य भी हैं कवि ने संस्कृतेतर छंदों का भी प्रयोग कहीं कहीं किया है यथा सवैया घनाक्षरी कुछ हाइकु भी इस भाग में निबद्ध हैं यथा -

तव वदनं 
निर्जितमदनं मे
सुख सदनम् 


2 गीतगुंजारव:-
इस भाग में 67 शीर्षकों में निबद्ध विभिन्न गीतियाँ संकलित हैं कवि गांधी से कहते हैं -

यत्पोषितं सर्वात्मना दधता त्वया सत्यव्रतम्
श्री महात्मन् अद्य तद् व्यथते त्वदीयं भारतम्

इसी भाग में 10 ग़ज़ल भी संकलित हैं जिन्हें कवि ने द्विपदिका कहा है ध्यातव्य है कि दो दो पँक्तियां मिलकर ग़ज़ल में शेर कहलाती हैं कवि वर्तमान समाज की विडम्बनाओं को प्रकट करते हुए कहते हैं-

परम्परा विकम्पितान्तराधुना विधूयते 
व्यथाकथा पुरातनी पुनर्नवानुभूयते

न दृष्टिमेति रामराज्यरंजितान्वयस्थिति-
र्गृहे गृहे दशास्यविग्रहप्रथा प्रसूयते 

यहां कुछ रुबाइयाँ है तो कुछ सॉनेट छन्द में गीतियाँ भी जिसे यहां चतुर्दशपदी कहाँ है क्योंकि इसमें 14 पंक्तियां होती हैं

3 मुक्तनिध्वानः-
इस भाग में मुक्तछन्द की शैली में कविताएं संकलित हैं जो 12 शीर्षकों में विभक्त है रेल स्थानके अर्द्धरात्रिरेका पौषमासस्य एक लंबी कविता है और बहुत मार्मिक है इसमें आधुनिक जीवन के अनुरूप  शब्द भी हैं

4 परिशिष्टम्-इस भाग में 7 शीर्षकों में प्रकीर्ण कविताओं का संकलन किया गया है यथा पद्यबद्धं पत्रोत्तरम्, शोध संगोष्ठ्या: पद्यबद्धं प्रतिवेदनम्, प्रशस्तिपंचकम्

नए शब्द प्रयोग, आधुनिक समाज का यथार्थ वर्णन, नए छंदों का प्रयोग आदि कई दृष्टियों से यह संकलन महत्त्वपूर्ण है यहां केवल संकेत मात्र किया गया है वस्तुतः यह संकलन विस्तृत समीक्षा की अपेक्षा करता है

4 comments:

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  2. धन्यवादः कौशल जी ।
    वस्तुतः भवतामयं प्रयासः प्रौढकाव्यसुगन्धविस्तारकः कविकर्मप्रकाशकः नवलेखनोत्प्रेरकः नवलेखकप्रोत्साहकः ।

    पठितमिदं लिखितम् । काव्यमिदं पठिष्यामि अग्रे ।

    सुशोभनम् ।

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  3. बहुत सुन्दर 👍

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  4. उत्कृष्ट रचना, पठनीय एवं संग्रहणीय कृति।

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